ब्यूरो रिपोर्ट | रक्षा एवं व्यापार | जेरूसलम, इजराइल
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का इजराइल का दो दिवसीय (25-26 फरवरी, 2026) ऐतिहासिक राजकीय दौरा आज अपने दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण दिन में प्रवेश कर गया है। अपनी इस यात्रा के दौरान श्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ इजराइली संसद (नेसेट) को संबोधित कर इतिहास रचा, बल्कि उन्हें प्रतिष्ठित ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से भी सम्मानित किया गया ।
यह सम्मान इजराइल की संसद का सर्वोच्च पुरस्कार है, जो भारत और इजराइल के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी में श्री नरेंद्र मोदी के असाधारण योगदान को रेखांकित करता है । इससे पहले बुधवार को नेसेट को संबोधित करते हुए श्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संबंधों का उल्लेख किया और कहा कि यह साझेदारी सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों की जनता के बीच गहरे जुड़ाव पर आधारित है ।
रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक साझेदारी: ‘आयरन डोम’ और ‘आयरन बीम’ का तोहफा
इस यात्रा की सबसे अहम उपलब्धियों में से एक रक्षा क्षेत्र में तकनीकी हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) को लेकर हुई प्रगति है। सूत्रों के अनुसार, इजराइल ने भारत को अपनी बहुचर्चित एयर डिफेंस सिस्टम ‘आयरन डोम’ और लेजर-आधारित ‘आयरन बीम’ तकनीक के पूर्ण हस्तांतरण की पेशकश की है ।
यह सौदा भारत की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। आयरन बीम एक 100-किलोवाट का हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम है, जो ड्रोन, रॉकेट और मोर्टार को मात्र 2-3 डॉलर प्रति इंटरसेप्शन की लागत से नष्ट कर सकता है, जबकि आयरन डोम के इंटरसेप्टर की लागत 50,000 से 100,000 डॉलर के बीच होती है ।
इस तकनीक के भारत में आने से डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही स्वदेशी ‘दुर्गा- II’ निर्देशित ऊर्जा हथियार प्रणाली और बहुस्तरीय एयर डिफेंस शील्ड ‘सुदर्शन चक्र’ को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा । इस समझौते से न सिर्फ भारत की सुरक्षा क्षमताओं में इजाफा होगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि ये सिस्टम भारत में ही निर्मित किए जाएंगे ।

मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वार्ता तेज
रक्षा सहयोग के अलावा, दोनों देशों के बीच एक महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर भी अहम बातचीत चल रही है। श्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा के साथ ही 23 फरवरी से नई दिल्ली में FTA के लिए पहले दौर की वार्ता शुरू हो चुकी है, जो आज समाप्त हो रही है । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नेसेट में अपने संबोधन के दौरान स्पष्ट किया कि दोनों देश इस समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि द्विपक्षीय व्यापार की अपार संभावनाओं को खोला जा सके ।
पूर्व इजराइली राजदूत श्री डैनियल कार्मोन के अनुसार, एफटीए के प्रति भारत का रुख अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सकारात्मक और प्रगतिशील हो गया है, और उन्हें उम्मीद है कि यह समझौता जल्द ही साकार होगा । इस समझौते से सिर्फ हीरे और रसायन ही नहीं, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और कृषि जैसे क्षेत्रों में भी द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है ।
‘एक भाई से भी बढ़कर रिश्ता’
इजराइली प्रधानमंत्री श्री बेंजामिन नेतन्याहू ने श्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में उन्हें “एक महान मित्र” और “भाई से भी बढ़कर” बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने मिलकर असंभव को संभव कर दिखाया है और उनके सहयोग को दोगुना, तिगुना और चौगुना किया है । श्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक ‘हेक्सागन’ गठबंधन की भी बात की, जिसमें भारत के साथ-साथ अरब देश, अफ्रीकी देश और भूमध्यसागरीय देश शामिल हो सकते हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक नए युग की शुरुआत हो सकती है ।
भारत की शांति के प्रति प्रतिबद्धता
गाजा में चल रहे संघर्ष के मद्देनजर श्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में संतुलित रुख अपनाते हुए क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा कि किसी भी कारण से नागरिकों की हत्या को उचित नहीं ठहराया जा सकता और आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है । उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना का भी स्वागत किया, जिसे उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग बताया ।
श्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आने वाले समय में भारत और इजराइल मिलकर रक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में उभरेंगे।
संपादकीय एवं अनुपालन नोट
यह लेख बाजार टिप्पणी और सार्वजनिक रूप से चर्चित जानकारियों पर आधारित है। यह केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश सलाह, वित्तीय अनुशंसा अथवा किसी राजनीतिक विचारधारा या राजनीतिक दल के समर्थन के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। राजनीतिचर्चा तटस्थ संपादकीय नीति का पालन करता है और आर्थिक परामर्श सेवाएं प्रदान नहीं करता है।