अपोलो कॉलेज में उपभोक्ता संरक्षण और डार्क पैटर्न पर विशेष व्याख्यान: डिजिटल युग में उपभोक्ता अधिकारों की जागरूकता आवश्यक

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ब्यूरो रिपोर्ट | चेन्नई, तमिलनाडु, भारत

चेन्नई: डिजिटल युग में बढ़ती ऑनलाइन धोखाधड़ी और भ्रामक व्यापार प्रथाओं के बीच उपभोक्ता जागरूकता एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, चेन्नई स्थित अपोलो आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में उपभोक्ता संरक्षण और डिजिटल युग में डार्क पैटर्न विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम छात्रों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती उपभोक्ता चुनौतियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से रखा गया था।

व्याख्यान तमिलनाडु उपभोक्ता संरक्षण संगठन (टीएनसीपीओ) से जुड़े और फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड इन्वेस्टर गुनोदय एसोसिएशन (FITIG) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं तमिलनाडु राज्य अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार मनोहरन ने दिया। उन्होंने छात्रों को भारत में उपभोक्ता संरक्षण के विकसित होते परिदृश्य से अवगत कराया और बताया कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म उपभोक्ताओं को प्रभावित करने के लिए डार्क पैटर्न नामक हेरफेरपूर्ण डिजाइन तकनीकों का उपयोग करते हैं।

क्या हैं डार्क पैटर्न और कैसे पहचानें?

डॉ. मनोहरन ने छात्रों को विस्तार से समझाया कि डार्क पैटर्न वे भ्रामक डिजाइन तकनीकें हैं जो उपयोगकर्ताओं को ऐसे निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती हैं, जो वे मूल रूप से नहीं लेना चाहते थे। उन्होंने ई-कॉमर्स वेबसाइट्स और मोबाइल एप्लिकेशन्स में आमतौर पर देखे जाने वाले विभिन्न प्रकार के डार्क पैटर्न की विस्तृत जानकारी दी।

मुख्य डार्क पैटर्न जिनकी चर्चा की गई:

  1. फाल्स अर्जेंसी (झूठी अत्यावश्यकता): जब वेबसाइट दिखाती है कि केवल कुछ ही उत्पाद बचे हैं या ऑफर समाप्त होने वाला है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। उदाहरण के लिए, “केवल 2 सीटें बचीं!” या “ऑफर समाप्त होने में 10 मिनट शेष” जैसे संदेश दिखाकर जल्दबाजी में खरीदारी के लिए उकसाना।
  2. बास्केट स्नीकिंग (टोकरी में घुसपैठ): चेकआउट के समय बिना उपभोक्ता की सहमति के अतिरिक्त वस्तुओं या सेवाओं को कार्ट में जोड़ देना। जैसे यात्रा बुकिंग साइट्स द्वारा बिना पूछे यात्रा बीमा जोड़ देना।
  3. कन्फर्म शेमिंग (शर्मिंदगी वाला दबाव): उपभोक्ता को शर्मिंदा करके निर्णय लेने के लिए मजबूर करना। जैसे किसी ऑफर को अस्वीकार करने पर “नहीं, मैं पैसे बचाने की परवाह नहीं करता” या “मैं जोखिम लूंगा” जैसे विकल्प दिखाना।
  4. फोर्स्ड एक्शन (जबरन कार्रवाई): उपभोक्ता को वह सेवा या उत्पाद प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त कार्रवाई करने के लिए मजबूर करना, जैसे न्यूज़लेटर के लिए साइन-अप करना या अनावश्यक व्यक्तिगत जानकारी साझा करना।
  5. सब्सक्रिप्शन ट्रैप (सदस्यता जाल): सदस्यता लेना तो आसान बनाना लेकिन उसे रद्द करना बेहद कठिन बना देना। कई बार फ्री ट्रायल के बाद बिना सूचना के स्वतः भुगतान शुरू हो जाना।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और डार्क पैटर्न

व्याख्यान में डॉ. मनोहरन ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और डार्क पैटर्न की रोकथाम के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) द्वारा जारी दिशानिर्देशों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत डार्क पैटर्न के खिलाफ समर्पित दिशानिर्देश जारी करने वाला दुनिया का पहला देश है।

नवंबर 2023 में जारी “गाइडलाइंस फॉर प्रिवेंशन एंड रेगुलेशन ऑफ डार्क पैटर्न्स, 2023” में 13 प्रकार के डार्क पैटर्न की पहचान की गई है, जिनमें फाल्स अर्जेंसी, बास्केट स्नीकिंग, कन्फर्म शेमिंग, फोर्स्ड एक्शन, सब्सक्रिप्शन ट्रैप, इंटरफेस इंटरफेरेंस, बेट एंड स्विच, ड्रिप प्राइसिंग, डिस्गाइज्ड एडवरटाइजमेंट, नैगिंग, ट्रिक वर्डिंग, सास बिलिंग और रॉग मालवेयर शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि ये सभी प्रथाएं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(47) के तहत “अनुचित व्यापार प्रथाओं” की श्रेणी में आती हैं। सीसीपीए के पास इन प्रथाओं में लिप्त कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है, जिसमें जुर्माना लगाने से लेकर सेवाएं रद्द करने तक के प्रावधान हैं।

सीसीपीए की हालिया कार्रवाइयां

डॉ. मनोहरन ने छात्रों को डार्क पैटर्न के खिलाफ सीसीपीए द्वारा की गई हालिया कार्रवाइयों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से दो प्रमुख मामलों का उल्लेख किया:

इंडिगो एयरलाइंस मामला: सीसीपीए ने इंडिगो के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पाया कि एयरलाइन यात्रियों को भुगतान युक्त सीट चयन के लिए मजबूर कर रही थी और ऐड-ऑन सेवाओं को अस्वीकार करने पर यात्रियों को “नहीं, मैं जोखिम लूंगा” जैसे संदेश दिखाकर कन्फर्म शेमिंग का उपयोग कर रही थी। सीसीपीए के हस्तक्षेप के बाद इंडिगो ने अपने इंटरफेस में बदलाव किया।

बुकमायशो मामला: बुकमायशो टिकट बुकिंग के समय बिना उपभोक्ता की सहमति के स्वतः ₹1 प्रति टिकट “बुकअस्माइल” चैरिटी के लिए जोड़ रहा था, जो बास्केट स्नीकिंग का एक उदाहरण था। सीसीपीए के नोटिस के बाद कंपनी ने यूजर इंटरफेस में बदलाव कर उपभोक्ताओं को स्पष्ट विकल्प दिया।

जागरूकता और सतर्कता की आवश्यकता

डॉ. मनोहरन ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल सेवाओं का उपयोग करते समय उपभोक्ता के रूप में अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता कार्य मंत्रालय ने डार्क पैटर्न की पहचान और रिपोर्टिंग के लिए दो मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किए हैं – जागृति ऐप और जागो ग्राहक जागो ऐप। ये ऐप उपभोक्ताओं को संदिग्ध यूआरएल की पहचान करने और सीसीपीए को रिपोर्ट करने में सहायता करते हैं।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे न केवल स्वयं सतर्क रहें बल्कि अपने परिवार और मित्रों को भी डिजिटल धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं के प्रति जागरूक करें। यह सामूहिक प्रयास ही एक सुरक्षित डिजिटल बाजार का निर्माण कर सकता है।

छात्रों की सक्रिय भागीदारी

व्याख्यान के दौरान छात्रों ने अत्यधिक उत्साह और सक्रियता दिखाई। उन्होंने ऑनलाइन गोपनीयता, भ्रामक विज्ञापन और उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र पर गहन प्रश्न पूछे। कई छात्रों ने अपने स्वयं के अनुभव साझा किए और डार्क पैटर्न से बचाव के उपायों पर चर्चा की।

कॉलेज के संकाय सदस्यों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी चर्चाएं छात्रों को तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बाजार में जिम्मेदारी से नेविगेट करने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यक्रम का समापन कॉलेज प्रबंधन द्वारा डॉ. सुरेश कुमार मनोहरन को सम्मानित करने के साथ हुआ। उन्होंने छात्रों को जागरूक और सतर्क उपभोक्ता बने रहने का संकल्प दिलाया। डिजिटल युग में उपभोक्ता संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता यह व्याख्यान छात्रों के लिए एक ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव साबित हुआ।

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