कर्नाटका में फार्मा वितरकों पर COA की बाध्यता: KPRDO का FDA आयुक्त को पत्र, व्यापारियों में रोष

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ब्यूरो रिपोर्ट | फार्मा,नीति | बेंगलुरु, कर्नाटक, भारत

कर्नाटक के दवा थोक विक्रेताओं ने FDA के नए COA सर्कुलर पर उठाए सवाल

बेंगलुरु, 1 मार्च 2026: कर्नाटक के दवा थोक विक्रेताओं ने राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा जारी एक नए सर्कुलर पर कड़ी आपत्ति जताई है। कर्नाटक फार्मा रिटेलर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑर्गेनाइजेशन (KPRDO) ने 28 फरवरी 2026 को FDA आयुक्त श्री के. श्रीनिवास, आईएएस को एक विस्तृत पत्र लिखकर इस नियम को व्यावहारिक रूप से असंभव और व्यापारियों के लिए बोझिल बताया है [citation:0]।

क्या है मामला?

FDA ने 23 फरवरी 2026 को एक सर्कुलर (संख्या: FSDA/L.I.P/Others/2/2025) जारी कर थोक विक्रेताओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया कि वे निर्माताओं से की जाने वाली हर खरीद पर “सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस” (COA) प्राप्त करें। COA एक दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि दवा के निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया है और बैच की जांच की गई है 

KPRDO की दलीलें: व्यावहारिक कठिनाइयां और डिजिटल विकल्प

KPRDO ने अपने पत्र में कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं:

1. व्यापारिक बोझ और डेटा चुनौती: KPRDO का तर्क है कि थोक विक्रेता हजारों लेन-देन करते हैं और हर बैच के लिए COA इकट्ठा करना, उसे सत्यापित करना और संभालना एक “हरक्यूलियन टास्क” है। संगठन ने पूछा है कि क्या इस आवश्यकता के पैमाने को समझने के लिए कोई व्यापक अध्ययन किया गया है [citation:0]।

2. कागज रहित अर्थव्यवस्था के खिलाफ: सरकार लगातार डिजिटल और पेपरलेस अर्थव्यवस्था पर जोर दे रही है, ऐसे में भौतिक COA दस्तावेजों को संग्रहीत करना पर्यावरण के विपरीत है। डिजिटल रिकॉर्ड की अनुमति होने पर भी उन्हें व्यवस्थित करना और जरूरत पड़ने पर पेश करना छोटे व्यापारियों के लिए संसाधन-गहन कार्य है [citation:0]।

3. अंतरराज्यीय व्यापार की समस्या: सबसे महत्वपूर्ण तर्क यह है कि कर्नाटक में केवल सीमित मात्रा में दवाओं का निर्माण होता है। अधिकांश दवाएं अन्य राज्यों से खरीदी जाती हैं। यदि केवल कर्नाटक में COA अनिवार्य किया गया तो दूसरे राज्यों के निर्माता इस नियम से अवगत नहीं होंगे और आपूर्ति बाधित हो सकती है। इससे दवाओं की कमी हो सकती है और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है [citation:0]।

4. केंद्रीय डिजिटल पोर्टल की मांग: KPRDO ने सुझाव दिया है कि इस मामले को केंद्र सरकार को भेजा जाए और जीएसटी सिस्टम की तरह एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल बनाया जाए। इस पोर्टल पर निर्माता बैच-वार COA अपलोड करें, जिसे थोक विक्रेता और नियामक प्राधिकरण आवश्यकतानुसार एक्सेस कर सकें [citation:0]।

5. हितधारकों से परामर्श का अभाव: संगठन ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में नियम बनाते समय हितधारकों से परामर्श नहीं किया जा रहा है। व्यापारी पहले से ही जीएसटी, आयकर, श्रम विभाग और स्थानीय निकायों से कई नियमों का सामना कर रहे हैं। मौजूदा स्वरूप में यह आवश्यकता छोटे और मध्यम स्तर के थोक विक्रेताओं के संचालन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है [citation:0]।

राष्ट्रीय परिदृश्य: नकली दवाओं पर सख्ती बढ़ रही है

गौरतलब है कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) नकली दवाओं के खिलाफ सख्ती बढ़ा रहा है। हाल ही में गठित एक समिति खुदरा विक्रेताओं और थोक विक्रेताओं की जिम्मेदारी बढ़ाने पर विचार कर रही है। वर्तमान में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 19 के तहत केवल निर्माताओं पर मुकदमा चलता है, जबकि खुदरा विक्रेताओं को छूट प्राप्त है। सरकार इस छूट को खत्म करने पर विचार कर रही है ताकि आपूर्ति श्रृंखला को साफ किया जा सके 

विशेषज्ञों का मानना है कि नकली दवाओं का बाजार भारत में लगभग 3 बिलियन डॉलर का है, जो कुल फार्मा बाजार (50 बिलियन डॉलर) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है 

तकनीकी समाधान पहले से मौजूद

यह उल्लेखनीय है कि CDSCO ने पहले ही सुगम (SUGAM) पोर्टल लॉन्च किया है, जो फार्मास्युटिकल क्षेत्र में पारदर्शिता और सादगी को बढ़ावा देता है। अक्टूबर 2024 तक, SUGAM ने 31,000 से अधिक उपयोगकर्ताओं को पंजीकृत किया है और 419,000 से अधिक आवेदनों को संसाधित किया है । KPRDO का प्रस्ताव इसी तरह के एक पोर्टल का है, जिसमें निर्माता सीधे COA अपलोड कर सकें।

हाल ही में मार्च 2025 में, CDSCO और C-DAC के बीच सुगम पोर्टल के रखरखाव और ऑनलाइन नेशनल ड्रग लाइसेंसिंग सिस्टम (ONDLS) के विकास के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं । यह प्रणाली सभी 34 CDSCO केंद्रों, फार्मा उद्योगों और राज्य प्राधिकरणों के बीच संपर्क स्थापित करेगी 

आगे की राह

KPRDO ने अपने पत्र में COA की अनिवार्यता को वापस लेने का अनुरोध किया है और मांग की है कि इस मामले को केंद्र सरकार को भेजकर पैन-इंडिया नीति बनाई जाए। संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर सिर्फ कर्नाटक में यह नियम लागू हुआ तो दवा वितरण व्यवस्था चरमरा सकती है और मरीजों को दवाओं की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

फार्मा विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों की व्यावहारिक कठिनाइयों को समझना भी जरूरी है। सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच संवाद से ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है।

KPRDO ने यह पत्र मुख्य सचिव डॉ. शालिनी रजनीश, आईएएस; स्वास्थ्य मंत्री श्री दिनेश गुंडू राव; और प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) श्री हर्ष गुप्ता, आईएएस को भी प्रतियां भेजी हैं 

कर्नाटक फार्मा रिटेलर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑर्गेनाइजेशन (KPRDO) ने FDA आयुक्त श्री के. श्रीनिवास, आईएएस को 28 फरवरी 2026 को एक पत्र लिखकर सभी थोक खरीद पर “सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस” (COA) अनिवार्य करने के सर्कुलर का विरोध किया है। संगठन का कहना है कि यह नियम सैद्धांतिक रूप से सही लगता है लेकिन व्यावहारिक रूप से लागू करना असंभव है। KPRDO ने इस मामले को केंद्र सरकार को भेजकर पैन-इंडिया डिजिटल पोर्टल बनाने की मांग की है।

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