ब्यूरो रिपोर्ट | नीति एवं राजनीति | नई दिल्ली, भारत
$25 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का संकल्प: युद्ध के संकट के बीच भारतीय व्यापारियों के लिए ‘कवच’ की मांग
फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड इन्वेस्टर गुणोदय एसोसिएशन (FITIG) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदित्य खन्ना ने भारत (India) के निर्यातकों को वैश्विक युद्ध संकट से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण मोर्चा खोला है। नेशनल ट्रेडर्स वेलफेयर बोर्ड (NTWB) को सौंपे गए एक ज्ञापन में, खन्ना ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो भारत (India) के MSME क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हो सकती है ।

व्यापार पर “युद्ध कर” का बोझ खन्ना ने बताया कि लाल सागर (Red Sea) संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। कोलकाता से रॉटरडैम का माल भाड़ा $500 से बढ़कर $4,000 के पार पहुंच गया है । इसके अतिरिक्त, जहाजों को अब ‘केप ऑफ गुड होप’ के लंबे रास्ते से जाना पड़ रहा है, जिससे 15-20 दिनों की देरी हो रही है और लगभग $15 बिलियन (लगभग ₹1.25 लाख करोड़) की पूंजी फंस गई है ।
चार मुख्य मांगें (Four Pillars):
- ब्याज में राहत: MSME के लिए ब्याज छूट (Interest Equalization) को 3% से बढ़ाकर 5% किया जाए ।
- FEMA नियमों में ढील: निर्यात राशि वापस लाने की अवधि 15 से बढ़ाकर 18 महीने की जाए ।
- सरकारी बीमा: निजी कंपनियों के महंगे प्रीमियम के बदले सरकार ‘नेशनल वॉर-रिस्क इंश्योरेंस पूल’ बनाए ।
- लॉजिस्टिक्स सब्सिडी: बढ़े हुए माल भाड़े को नियंत्रित करने के लिए ‘कनफ्लिक्ट-रूट सब्सिडी’ दी जाए ।
आदित्य खन्ना ने जोर देकर कहा कि यह केवल व्यापारियों का नुकसान नहीं है, बल्कि ‘ब्रांड इंडिया’ की साख का सवाल है । उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को संसद में ‘ग्लोबल वॉर रिलीफ एक्ट’ का इंतजार करने के बजाय मौजूदा ‘फॉरेन ट्रेड एक्ट’ के तहत तत्काल कार्यकारी आदेश (Executive Orders) जारी करने चाहिए ।

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